मंगलवार को अगरतला में राजभाषा हिंदी पर दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत क्षेत्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, खुमलुंग द्वारा किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने उक्त कार्यक्रम का उद्घाटन किया। क्षेत्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान के अनुसंधान अधिकारी (वैज्ञानिक) डॉ. रतन चंद्र शील ने अपने स्वागत भाषण में हिंदी को राजभाषा के रूप में लागू करने के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से हिंदी भाषा पर इस तरह की कार्यशाला का आयोजन बहुत ही समयानुकूल है, क्योंकि हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो सभी सरकारी विभागों के बीच सहज समन्वय का अच्छा माध्यम बनेगी। विभिन्न सत्रों में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने चर्चा की कि देश के विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपना सरकारी काम-काज हिंदी में किस प्रकार बेहतर ढंग से कर सकते हैं। उन्होंने उन तकनीकों पर प्रकाश डाला जो आसानी से की जा सकती हैं। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने सरकारी पत्र-व्यवहार और शोध पत्रों में हिंदी भाषा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न उच्चाधिकारियों से अपने दैनिक जीवन में हिंदी भाषा को शामिल करने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आह्वान किया।